अहिंसा के सबसे बड़े पुजारी स्वर्गीय श्री महात्मा गाँधी के इस राम राज्य और अहिंसा कल्पित राज्य में आज अहिंसा की भाषा कोई नहीं सुनता है. अहिंसा के मार्ग को अपनाते हुए यदि कोई अपने अधिकारों के लिए लड़ता है तो सरकार के कानों के परदे तक उनकी आवाज नहीं पहुचती है. इतिहास गवाह है. जब तक दंगे फसाद न हो, सड़कों पर हौ हल्ला न हो, बसों, ट्रेनों में तोड़ फोड़ न हो, चक्का जाम न हो, तब तक सरकार में चेतना का प्रवाह नहीं होता है. ये आज इस देश का दुर्भाग्य ही है कि गाँधी को अपना आदर्श बताने वाली हर एक राजनीतिक पार्टी उनके बताये गए सिधांतों से बहुत दूर है.
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