Tuesday, April 19, 2011
क्रिकेट को लेकर राजनय और राजनीति में फर्क करना चाहिए। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सेमिफाइनल के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को आमंत्रित कर एक राजनीतिक पासा फेंका। एक ऐसे वक्त में जब मनमोहन सिंह पर आरोप लग रहे थे कि विदेश नीति के मामलों में कमज़ोर साबित हो रहे हैं, उन्होंने विपक्ष को जवाब भी दिया और मैच देखने के बहाने एक संदेश भी दिया कि भारत पाकिस्तान के साथ बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहता है। मगर जब राजनयिक आपस में बात करेंगे तो ज़ाहिर है वहां क्रिकेट के स्कोर की चर्चा नहीं होगी। बातचीत की मेज़ पर इस बात का भी फर्क नहीं पड़ेगा कि मोहाली में किसने किसको हराया। मुंबई हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय दबावों के बाद भी पाकिस्तान में हमले के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। आतंकवाद पर आज भी उसका नज़रिया बहुत साफ और भरोसा का नहीं है। क्या यह सब क्रिकेट के मैदान के ज़रिये बदल सकता है? क्या कभी ऐसा हो सकेगा कि मैच के नतीजे का असर कश्मीर की समस्या पर पड़ेगा? किसी राजनयिक से पूछेंगे तो मुस्करा देगा।
Tuesday, March 15, 2011
यह खतरनाक स्थिति है कि इच्छा मृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट को निर्णय देना पडा। किस तरह इच्छा मृत्यु के पक्ष में लोग अदालत में बहस कर पाये होगें यह कल्पना से बाहर की बात है।बहस तो केवल उन्हीं विषयों पर होती रही है, जिसमें अपना और दूसरों के हित टकराते है।बहस करने वाले अच्छी तरह समझते है कि यदि वे सत्य के साथ है भी तो केवल अपने स्वार्थ के कारण। इनका सत्य से कुछ भी लेना देना नहीं ,सत्य की केवल दुहाई दी जाती है।राजनीतिक मंचों आर्थिक लाभ या फिर निहित स्वार्थों के लिए बहस होती रहती है, लेकिन इच्छा मृत्यु के लिए बहस करना असम्भव है। और यह असम्भव कार्य अरूणा के नाम पर दूसरों ने कैसे किया होगा यह आश्चर्य है।
दरअसल इच्छा मृत्यु कोई बात होती ही नहीं है।यदि मृत्यु की भी इच्छा है, तो स्पष्ट है कि इच्छा करने वाला मन तो अभी सजग है ।अन्यथा इच्छा की बात कौन कर रहा है?और जब तक मन सक्रिय है तब तक मृत्यु की इच्छा कैसे हो सकती है। कुछ लोग रोगी की पीडा का हवाला देते हैं,इसका मतलब यह हुआ कि पीडाओं से मुक्ति के लिए मौत को जायज मान लिया जाए, इस तरह तो देश में आत्महत्या करने वाले किसानों की पीडा के लिए कोई समाज और सरकार कोई कसूरवार नहीं होगा जो पीडित है उसे मर जाना चाहिए। लेकिन इस तर्क का एक और पक्ष झूठा है जो कहता है कि उसको असह्य पीडा में जीना पड रहा है। जब पीडा असह्य होगी है तो उसका स्वाभाविक परिणाम मौत है ही फिर उसे जहरीला इंजैक्शन क्यों दिया जाना चाहिए।
कहीं ऐसा तो नहीं कि यह स्थिति से उकता गये लोगों की दलील हो।कुछ लोग परिस्थितियों से निराश हो सकते है। इसमें कोई शर्म नहीं होनी चाहिए,लेकिन इसके पक्ष में दलीलें पेश करना तो निश्चित ही शर्मनाक है।
Saturday, March 5, 2011
Thursday, February 24, 2011
रेल मंत्री ममता बनर्जी द्वारा लोकसभा में शुक्रवार को पेश किए जाने वाले रेल बजट में 100 नई ट्रेनों का ऐलान किया जा सकता है इनमें से करीब एक दर्जन नॉन स्टाप दूरंतो ट्रेनें शामिल होंगी।
पेश किए जाने वाले 2011-12 के रेल बजट में संभवत: मेट्रो शहरों में बड़े रसोईघरों की स्थापना भी उल्लेख होगा। इन रसोईघरों में प्रतिदिन 50,000 से एक लाख रेल यात्रियों के लिए भोजन तैयार किया जा सकता है। नई कैटरिंग नीति के अनुसार रेलवे खुद इन रसोईघरों की देखरेख का काम करेगी।
बनर्जी को दो माह में प. बंगाल में विधानसभा चुनावांे का सामना करना है। ऐसे में वह अपने राज्य के लिए कई परियोजनाओं की घोषणा कर सकती हैं। इनमें से व्यस्त हावड़ा से सियालदाह स्टेशनों को रेल लिंक से जोड़ने की परियोजना भी है। यह लाइन कोलकाता के घनी आबादी वाले मध्य जिलों से गुजरेगी।