पाषाण समाज के सीने पे पडी नन्ही अश्रु की बूँद गाती है अनसुना गीत सुनाती है अजन्मी कहानी . उसकी गिरेबां को पकडे रोती ,बिलखती , कोसती, झकझोरती , सवाल करती , पता पूछती हैं उस भ्रूण हत्यारे का फिर सहसा आंसू पोछती .सोचती कहती की अच्छा हुआ जनम से पहले मिट गयी पैदा होती तो क्या होता|
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