Friday, January 29, 2010

मध्यस्थों के हाथ में आर्थिक नीतियों का नियंत्रण

मध्यस्थों के हाथ में आर्थिक नीतियों का नियंत्रण

कांग्रेस सरकार महंगाई पर नियंत्रण पर मतिभ्रमता की स्थिति में है। जनता के सामने बहाना बनाकर अपने निकम्मेपन को छुपाने के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगी एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं। काँग्रेस नेता महंगाई के राज्यों को उत्तरदायी बता रहे हैं। लेकिन, वर्तमान सरकार की आर्थिक नीतियॉ किसान और मजदूर विरोधी है। ये जमाखोरों और बिचोलियों को फायदा पहुंचाने वाली है। अगर हम सरकार के कार्यकाल को देखें तो यह आरोप सही साबित होता है। यह सरकार किसान विरोधी है, क्योंकि यह सरकार देश के किसान से गेहूं ९.५०/- रूपए प्रति किलो खरीद रही है और विदेश किसान से १६/- रूपए प्रति किलो खरीद रही है। पिछले साल अरहर दाल का न्यूनतम समर्थन मूल्य २३ रूपए था, विदेशी किसान को २६ रूपए दाम देकर दाल का आयात किया गया था। आज किसान से १० रूपए प्रति किलो के हिसाब से धान खरीदा जा रहा है और ग्राहक से ४० रूपए प्रति किलो वसूला जा रहा है।

कांग्रेस सरकार मार्च २००९ तक देश में चीनी के पर्याप्त भंडार होने की घोषणा करती रही। सरकार के वरिष्ठ मंत्री दो वर्ष तक चिंता नहीं करने के लिए आश्वस्त कर रहे थे। इसलिए, ४८ लाख टन चीनी १२/- रूपए प्रति किलो के हिसाब से निर्यात की गई। पिछले ६ महीनों में सरकार को अचानक याद आता है कि चीनी की कमी होने वाली है। और आज वही चीनी ३० रूपए प्रति किलो के हिसाब से आयात हो रही है। सरकार आम आदमी की विरोधी है। इसलिए सरकार विदेशी ग्राहक को १२ रूपए में चीनी बेच रही है और वहीं देशी ग्राहक से ४४ रूपए वसूल रही है। देश में चीनी के मूल्य अनियंत्रित हो रहे हैं किन्तु बंदरगाहों ३० लाख टन कच्ची चीनी ३ माह से पड़ी हुई है। सरकार उसे बाजार में लाने का कोई प्रयास ही नहीं कर रही है।

यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि बिचोलिए और जमाखोर चीनी, चावल, दाल, गेहूं का कब आयात करना है और कब निर्यात करना का निर्णय कर रहे हैं। देश के किसान और गरीब आदमी को लूटा जा रहा है। कांग्रेस चुनाव में वोट आम आदमी के नाम पर लेती है लेकिन, सत्ता में आते ही सटोरियों और मुनाफाखोरों को फायदा पहुंचाती है। यह यक्ष प्रश्न है कि आखिर इस देश का किसान और गरीब आदमी कब तक लुटता रहेगा। सरकार की आर्थिक नीतियों का नियंत्रण मध्यस्थों एवं दलालों के हाथ में है। जन साधारण किससे राहत की आशा करें।

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