आज की शिक्षा व्यवस्था।
आजकल मैं अपने गाँव में हूँ और अपने आप को समाज के प्रति जिम्मेदार समझ कर गाँव के बच्चों को पढाने के लिए बहुत ही मनोयोग से जुट गया, लेकिन यह देख कर इतना दुःख हुआ कि कक्षा ५ या ६ में पढने वाले विद्यार्थी को ना तो ठीक से पहाडा आता है ना तो इमला और अंग्रेजी तो माशाल्लाह है॥ क्या सारी जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की ही है अभिभावकों की नहीं। और सरकार के ६५% साक्षरता के दावों का क्या, क्या इसी को साक्षर कहते हैं? हमारे अध्यापक तो बस किसी तरह कोरम पूरा कर रहें हैं। आइये कुछ प्रयास करें की आने वाली पीढ़ी हमें कोसे नहीं।
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