Saturday, January 30, 2010


आज की शिक्षा व्यवस्था

आजकल मैं अपने गाँव में हूँ और अपने आप को समाज के प्रति जिम्मेदार समझ कर गाँव के बच्चों को पढाने के लिए बहुत ही मनोयोग से जुट गया, लेकिन यह देख कर इतना दुःख हुआ कि कक्षा ५ या ६ में पढने वाले विद्यार्थी को ना तो ठीक से पहाडा आता है ना तो इमला और अंग्रेजी तो माशाल्लाह है॥ क्या सारी जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की ही है अभिभावकों की नहीं। और सरकार के ६५% साक्षरता के दावों का क्या, क्या इसी को साक्षर कहते हैं? हमारे अध्यापक तो बस किसी तरह कोरम पूरा कर रहें हैं। आइये कुछ प्रयास करें की आने वाली पीढ़ी हमें कोसे नहीं।

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